दुनिया जिस रफ्तार से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ रही है, उसी रफ्तार से एक अहम धातु पर दबाव बढ़ता जा रहा है — कॉपर (तांबा)। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कॉपर की वैश्विक सप्लाई गंभीर चुनौती का सामना कर सकती है।
AI डेटा सेंटर्स बने नई मांग का इंजन
AI डेटा सेंटर्स को भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। हाई-डेंसिटी सर्वर, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क, कूलिंग सिस्टम और बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर — इन सभी में कॉपर की बड़ी भूमिका होती है।
जैसे-जैसे AI का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कॉपर की मांग भी नॉन-साइक्लिकल और स्थायी होती जा रही है।
ग्रीन एनर्जी और कॉपर का गहरा रिश्ता
विंड और सोलर एनर्जी को भविष्य की ऊर्जा माना जा रहा है, लेकिन इसके लिए भारी मात्रा में कच्चे माल की जरूरत होती है।
एक अनुमान के अनुसार, 1 गीगावॉट (GW) विंड पावर प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2,866 टन कॉपर की आवश्यकता होती है। इसमें पावर केबल, जनरेटर, ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड कनेक्शन शामिल हैं।
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